विदेशी मादक पदार्थ अपराधियों के शीघ्र निर्वासन हेतु केंद्र का निर्देश

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/आंतरिक सुरक्षा

समाचार में  

  • गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मादक पदार्थ मामलों में संलिप्त विदेशी नागरिकों के निर्वासन की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने का निर्देश दिया है।

विदेशी अपराधियों पर आँकड़े 

  • वर्ष 2024 में 660 विदेशी नागरिक मादक पदार्थ अपराधों में गिरफ्तार किए गए, जिनमें अधिकांश नेपाल, नाइजीरिया, म्यांमार, बांग्लादेश, आइवरी कोस्ट और घाना से थे।
  • एनसीआरबी (2023) के अनुसार भारतीय जेलों में 6,956 विदेशी कैदी हैं: 1,499 दोषी, 5,167 विचाराधीन और 25 निरुद्ध।
  • पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में इन कैदियों का 65% से अधिक हिस्सा है।

निर्वासन की आवश्यकता 

  • लंबे कानूनी प्रवास की रोकथाम: न्यायालय में विलंब के कारण विदेशी अपराधी वर्षों तक भारत में रहते हैं, जिससे जेलों और न्यायिक प्रणाली पर दबाव बढ़ता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य: मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क प्रायः संगठित अपराध और अंतर्राष्ट्रीय गिरोहों से जुड़े होते हैं, जो केवल नशीले पदार्थों से परे जोखिम उत्पन्न करते हैं।
  • निवारक प्रभाव: शीघ्र निर्वासन भारत की मेहमाननवाज़ी और वीज़ा प्रणाली के दुरुपयोग को हतोत्साहित करने वाला सशक्त संदेश देता है।

चुनौतियाँ 

  • कूटनीतिक संवेदनशीलताएँ: निर्वासन में विदेशी सरकारों के साथ समन्वय आवश्यक होता है, जो कभी-कभी तनावपूर्ण संबंधों के कारण जटिल हो जाता है।
  • मानवाधिकार चिंताएँ: निर्वासन अंतर्राष्ट्रीय संधियों के अनुरूप होना चाहिए, जिसमें विधिक प्रक्रिया और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित हो।
  • समन्वय की कमी: एनसीबी, राज्य पुलिस और आव्रजन प्राधिकरण जैसी कई एजेंसियों के बीच सुचारु सहयोग की आवश्यकता होती है, जो प्रायः अनुपस्थित रहता है।
  • संसाधन दबाव: निर्वासन तक विदेशी अपराधियों की निगरानी कानून प्रवर्तन और जेल संसाधनों पर भार डालती है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम 

  • आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम, 2025: 1 सितंबर 2025 से प्रभावी, यह अधिनियम कुछ अपराधों के निपटारे की अनुमति देता है, जिससे लंबी सुनवाई के बिना शीघ्र निर्वासन संभव होता है।
  • मानक संचालन प्रक्रिया (SOP): अभियोजन वापसी, जमानत पर मामले, चल रही सुनवाई, अपील और न्यायालय द्वारा निर्देशित वीज़ा प्रवास को कवर करती है।
  • जिला एसपी/डीसीपी: अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं।
  • ट्रैकिंग एवं वीज़ा प्रबंधन: अपराधों में आरोपित विदेशी नागरिकों के वीज़ा तुरंत एफआरआरओ द्वारा रद्द कर दिए जाते हैं।
    • जाँच और सुनवाई के दौरान इन व्यक्तियों की निगरानी अनिवार्य है।
    • एसओपी यह सुनिश्चित करती है कि विदेशी नागरिकों से संबंधित मामलों का उचित प्रबंधन हो, जिनमें अभियोजन वापसी हेतु न्यायालय की सहमति आवश्यक हो।
  • गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश: कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि छोटे अपराधों में दोषी पाए गए व्यक्तियों को सज़ा पूरी होते ही या जुर्माना भरते ही तुरंत निर्वासित किया जाए।
    • यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया है, तो व्यक्ति को निर्वासित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए।
  • पुलिस की भूमिका: राज्यों की पुलिस ऐसे व्यक्तियों की सूची तैयार कर रही है और अभियोजन वापसी हेतु आवेदन प्रस्तुत कर रही है, ताकि कानूनी विलंब के कारण लंबे प्रवास से बचा जा सके।

निष्कर्ष एवं आगे की राह 

  • भारत में विदेशी मादक पदार्थ अपराधियों का निर्वासन न्यायालय और जेलों के भार को कम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने और अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नेटवर्क को बाधित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • यद्यपि न्यायिक विलंब, कूटनीतिक समन्वय और मानवाधिकार चिंताएँ चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं, सरकार के हालिया त्वरित निर्वासन उपाय कानून प्रवर्तन एवं अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास हैं।

स्रोत :IE

 

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